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Thursday, April 23, 2020

अब भारत को बेवकूफ नहीं बना पाएगा चीन, वैज्ञानिकों ने उठाया बड़ा कदम


कोरोना वायरस की जांच के लिए IIT दिल्ली ने बनाई RT-PCR किट, ICMR से मिली हरी झंडी

नई दिल्ली: ऐसे वक्त में जब देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण को टेस्ट करने के लिए किट की भारी तादाद में जरूरत है और चीन जैसे देशों से जो किट आई हैं उनमें अधिकतर की क्वालिटी खराब निकल रही है. अब ऐसे मुश्किल समय में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक कमाल दिखाया है. जी हां, आईआईटी दिल्ली ने rt-pcr किट बनाकर तैयार की है जिसको आईसीएमआर ने भी जांच के बाद हरी झंडी दिखा दी है. अब इसी किट से देश भर में आरटी पीसीआर किट के जरिए टेस्ट होंगे.

ये किट जल्द ही बाजार में उपलब्ध होगी. IIT दिल्ली की दो कम्पनियों से इसके लिए बातचीत चल रही है. बाजार में आने के बाद सस्ते और सही तरीके से कोरोना की जांच हो सकेगी. IIT दिल्ली के कुसुमा स्कूल ऑफ बॉयोलोजिकल साइंसेज के रिसर्चर्स ने कोविड-19 की जांच के लिए जो किट तैयार की है उसे ICMR ने अपनी मंजूरी दे दी है.

बता दें कि देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना (Coronavirus) के मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक कोरोना संक्रमितों की संख्या 23 हजार के पार पहुंच गई है. जबकि मरने वालों की संख्या बढ़कर 718 हो गई है. 4749 मरीज ठीक होकर अपने घर वापस जा चुके हैं. 


चीन को लेकर सटीक भविष्यवाणी करने वाले नोबेल विजेता वैज्ञानिक का दावा- कोरोना का अंत निकट


चीन को लेकर सटीक भविष्यवाणी करने वाले नोबेल विजेता वैज्ञानिक का दावा- कोरोना का अंत निकट

एक ओर जहां पूरी दुनिया कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर चिंतित है वहीं नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) विजेता एक वैज्ञानिक (Scientist) ने दावा किया है कि कोरोना का अंत निकट है.  स्टैनफोर्ड बायोफिजिसिस्ट माइकेल लेविट का कहना है कि कोरोना वायरस से जितना बुरा होना था हो चुका लेकिन अब हालात बेहतर होंगे. 

लेविट ने लॉस एंजेल्स टाइम्स को दिए इंटरव्यू में यह दावा किया. उनके इस दावे को गंभीरता से लिया जा रहा है कि क्योंकि चीन में कोरोना वायरस को लेकर उनकी भविष्यवाणी सही साबित हुई थी. 

दरअसल चीन को लेकर विशेषज्ञ यह दावा कर रहे थे कि चीन में कोरोना वायरस को कंट्रोल करने मं लबा समय लग जाएगा और इससे प्रभावित लोगों की संख्या लाखों में हो सकती है. 

लेविट ने फरवरी में यह भविष्यवाणी की थी कि चीन में हालात सुधरेंगे. उनकी भविष्यवाणी के बाद धीरे-धारे चीन में हालात बेहतर होने लगे. चीन ने कोरोना वायरस पर काफी हद तक काबू पा लिया है. कोरोना का सबसे बड़ा केंद्र रहा चीन का हुबेई प्रांत लंबे लॉकडाउन के बाद अब खुलने वाला है. 

लेविट ने चीन में कोरोना के मरीजों और इससे होने वाली मौतों को लेकर भी सटीक अनुमान लगाया. उन्होंने अनुमान लगाया था कि चीन में कोरोना के 80,000 मामले आ सकते हैं और 3250 मौतें हो सकती हैं. मंगलवार तक चीन में 3277 मौतें और 81171 मामले सामने आए

आपको बता दे की भारत मे भी भविष्यवानी के हिसाब से june के अंत तक  इसका प्रभाव कम हो जायेगा 

CORONAVIRUS पर बड़ी खुशखबरी! भारत के ये 3 राज्य वायरस संक्रमण से हुए पूरी तरह मुक्त


नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर लगातार जारी है लेकिन इस बीच इससे जुड़ी राहत की खबर भी सामने आई है. देश के 3 राज्य अब तक कोरोना संक्रमण से पूरी तरह मुक्त हो गए हैं.

ताजा मामला त्रिपुरा का है जहां कोरोना के सभी मरीज ठीक हो गए हैं. वहीं गोवा और मणिपुर भी उन राज्यों में शामिल हैं, जहां कोरोना का प्रकोप शांत हो गया है. ये राज्य भी कोरोना से मुक्त हो गए हैं.  

त्रिपुरा के सीएम बिप्लव कुमार देव ने भी ट्वीट के जरिए खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि कोरोना का दूसरा मरीज भी टेस्ट के बाद निगेटिव निकला. इस तरह हमारा राज्य कोरोना से मुक्त हो गया है. 

बिप्लव ने कहा कि मैं सभी लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग और सरकारी गाइडलाइन का पालन करने का अनुरोध करता हूं. घर पर रहें और सुरक्षित रहें. 

सीएम बिप्लव ने कहा कि मैं सभी डॉक्टरों, हेल्थकेयर स्टाफ और सभी कोरोना फाइटर्स को त्रिपुरा को कोरोना फ्री बनाने के लिए धन्यवाद देता हूं.  सोशल डिस्टेंस बनाकर और सरकारी गाइडलाइन को फॉलो कर हम बेहतर रिजल्ट दे सकते हैं. माता त्रिपुरासुन्दरी का आशीर्वाद हमारे साथ है

बता दें कि गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि देश में कोरोना संक्रमण के अब तक कुल 21 हजार 393 मामले हैं. 

कोरोना संक्रमण से 4258 लोग ठीक हुए हैं और 681 लोगों की मौत हुई है. अभी कोरोना के 16454 एक्टिव केस हैं. बीते 24 घंटे में 1409 नए केस सामने आए हैं.

मंत्रालय ने बताया था कि 78 जिलों में 14 दिनों से कोरोना का कोई नया केस सामने नहीं आया है. इसके अलावा 9 राज्यों के 33 जिलों में कोरोना का कोई नया केस सामने नहीं आया है. 12 जिले ऐसे हैं जहां 28 दिनों से कोई कोरोना का केस नहीं आया 

अगर आपके पास देश के श्रम और रोजगार मंत्री का फोन आए तो चौंकिएगा नहीं' जाने क्यू और किसको कर रही है ..










'अगर आपके पास देश के श्रम और रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार का फोन आए तो चौंकिएगा नहीं'
   

केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने देशभर में 20 कंट्रोल रूम बनाए हैं.

नई दिल्‍ली: केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने देशभर में 20 कंट्रोल रूम बनाए हैं. इन कंट्रोल रूम के मोबाइल और ईमेल पर नौकरी, मजदूरी, सैलरी, पीएफ से संबंधित शिकायत बताने को कहा जा रहा है.शिकायत आने के बाद उस शिकायत या समस्या के निपटारे के लिए 48 घंटे का समय दिया गया है और सबसे खास बात ये कि शिकायत निपटाने के बाद आप संतुष्ट हुए या नहीं, इसके लिए भी आपके पास फोन आएगा. मंत्रालय के कंट्रोल रूम के नियम ये कहते हैं कि हरेक राज्य के नोडल अधिकारी दिन में 5 कॉल करेंगे कि आप समस्या समाधान से संतुष्ट हैं या नहीं.
इसी तरह केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री के ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) दिन में 3 कॉल करेंगे और पूछेंगे कि आपको समाधान मिला है या नहीं और तो और केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार दिन में 5 लोगों को कॉल करके यह पूछेंगे कि आप समस्या के समाधान से खुश हैं या नहीं.
कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी हरेक राज्य के चीफ लेबर कमिश्नर के जिम्मे है. मोबाइल नंबर और ईमेल नंबर लोगों के लिए खोल दिए गए हैं ताकि अगर किसी की नौकरी बेवजह ली जा रही हो, या मजदूरी ,सैलरी की कोई समस्या हो ,पीएफ निकालने में दिक्कत आ रही हो, EPFO,ESIC से संबंधित कोई समस्या आ रही हो तो लोग अपनी बात रख सकें.
इसके साथ ही श्रम मंत्रालय की गाइडलाइन में सभी श्रम और रोजगार संबंधित विभागों और लेबर कमिश्नर्स को ये निर्देश दिए गए हैं कि वह केवल खानापूर्ति या नाम के लिए ही लोगों की समस्या समाधान का डेटा ना बनाएं बल्कि कोरोना के चलते परेशानी में पड़े लोगों की सही में मदद करें. प्रधानमंत्री कार्यालय से भी ये निर्देश हैं कि मानवीयता दिखाते हुए समस्या का तुरंत समाधान करें.
इसका असर भी दिखने लगा है अब ईपीएफओ ने ऐसे लोगों का रिकॉर्ड रखना शुरू कर दिया है जिन की समस्याएं हल हुई है.
अरुणाचल प्रदेश के अविनाश सोनार को पैसों की ज़रूरत थी. पीएफ निकालने के लिए अप्लाई किया तो EPFO ने पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत चार दिन के अंदर उनके अकाउंट में पीएफ का पैसा डाल दिया. इसी तरह राजामुंदरी (आंध्र प्रदेश) के कोमार्थी श्रीनिवास चक्रवर्ती के अकाउंट में एक दिन में पीएफ का पैसा आ गया. EPFO ने इस बात की तस्दीक करने के लिए इन लोगों से वीडियो और मैसेज पर कन्फर्मेशन भी मांगे .
इसी तरह अलग-अलग कंपनियों और संस्थाओं से भी उनकी संतुष्टि के बारे में फीडबैक मांगे गए, जैसे कि छत्तीसगढ़ की लघु उद्योग भारती ने बाकायदा लंबा चौड़ा पत्र लिखकर अपने सदस्यों के पीएफ मामले तुरंत निपटारे के लिए धन्यवाद पत्र लिखा.
श्रम मंत्रालय के मुताबिक पिछले 15 दिन में 10 लाख लोगों को 3600 करोड़ रुपए का पीएफ दे दिया गया है. इसमें से पीएम कल्याण योजना वाले 6 लाख लोगों के करीब 2000 करोड़ भी शामिल हैं. वहीं 100 कर्मचारियों वाली फर्म में 15000 की सैलरी वालों का पीएफ का 24% हिस्सा सरकार ही भर रही है, इसके अलावा कंपनियों को पीएफ काटने के बाद उसे सरकार के पास जमा कराने के लिए 1 महीने अतिरिक्‍त दिए हैं. कंट्रोल रूम की सुविधा भी इसलिए ही दी गई है ताकि वर्कर की हर तरह की समस्या का निपटारा हो.


Wednesday, April 22, 2020

5 महामारियां, जिनसे बदल गई दुनिया! कोरोना तो सिर्फ एक 'ट्रेलर' है... पढ़े कौन कौन सी थी वो खतरनाक बीमारिया


नई दिल्ली: कोरोना महामारी का दुनिया में संकट इस कदर मंडरा रहा है कि हर कोई बेबस और लाचार हो गया है. अमेरिका से लेकर इटली फ्रांस स्पेन तक कोरोना संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा हर देश में काफी ज्यादा है. लेकिन क्या आपको इस बात की थोड़ी भी जानकारी है कि कोरोना के अलावा ऐसी भी महामारी है जिसने दुनिया को इतना बेबस कर दिया था कि 20 करोड़ लोग एक झटके में मौत की आगोश में चले गए.

आंकड़े बता रहे हैं दुनिया में कोरोना का नरसंहार जारी है. महाशक्तियां खौफ़ मे हैं, रास्ता नहीं दिख रहा कोरोना की रफ्तार कैसे और कब तक रुकेगी. लेकिन कोरोना पहले भी दुनिया ने ऐसी बुरी स्थिति का सामना किया है, जब सिर्फ एक विषाणु ने करोड़ों लोगों की सांसे हमेशा-हमेशा के लिए रोक ली. आपको ऐसी ही 5 महामारी से दो-चार होने की आवश्यकता है.

5 महामारियां, जिनसे बदल गई दुनिया

1. BLACK DEATH
BLACK DEATH यानी काली मौत... ये यूरोप के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसके बारे में सोच कर भी हर किसी की रूह कांप उठती है. कोई भी उस मौत के तांडव की दास्तां को याद भर करता है तो उसका पोर-पोर थर्रा उठता है. ये मौत का वही मंजर है जिसने एक या दो नहीं बल्कि करीब 20 करोड़ लोगों को मार डाला. इस महामारी के सितम को सुनकर किसी को भी अपने कांनों पर यकीन नहीं होता है. 

इस खौफनाक काली मौत ने 1346 के आस पास अपनी दस्तक दी थी, जिसके भयावह प्रभाव ने पूरे यूरोप को तबाही की कगार पर ला खड़ा कर दिया था. जानकारी के अनुसार इस महामारी का असर करीब 1353 तक रहा. यूरोप में एक प्रकाशन के माध्यम से ये बात सामने आई थी कि ये एक प्रकार का विषाणु है. जो प्लेग के अलग-अलग रूप में होने के कारण था. 


इस खौफनाक काली मौत ने 1346 के आस पास अपनी दस्तक दी थी, जिसके भयावह प्रभाव ने पूरे यूरोप को तबाही की कगार पर ला खड़ा कर दिया था. जानकारी के अनुसार इस महामारी का असर करीब 1353 तक रहा. यूरोप में एक प्रकाशन के माध्यम से ये बात सामने आई थी कि ये एक प्रकार का विषाणु है. जो प्लेग के अलग-अलग रूप में होने के कारण था. 

2. SPANISH FLU
वो दौर भी बड़ा अजीब था... जिस वक्त पूरी दुनिया साल 1918 में प्रथम विश्व युद्ध के सदमे से निकलने की कोशिश में जुटी थी. उसी वक्त स्पेनिश फ्लू नाम की 'मौताना मंजर' का तांडव पूरी दुनिया ने देखा. उस वक्त हर कोई उस खौफनाक पल का गवाह बना, क्योंकि जितने लोगों ने पहले विश्व युद्ध से अपनी जान गंवाई थी, उतने से दोगुनी संख्या में लोगों को इस स्पेनिश फ्लू नामक महामारी ने अपना शिकार बना लिया.


स्पेनिश फ्लू का कहर दुनिया पर कुछ यूं बरपा कि उस समय दुनिया के करीब 1/3 लोग इस बीमारी के चपेट में आ गए. संक्रमित लोगों का आंकड़ा लगभग 50 करोड़ पहुंच गया था. उस दौर में 5 करोड़ लोगों के मारे जाने का अनुमान लगाया गया. अकेले अमेरिका में 6 लाख 75 हज़ार लोगों की मौत हो गई थी. जो मानव इतिहास की सबसे भीषण महामारियों में से एक थी, स्पेनिश फ्लू...

3. JUSTINIAN PLAGUE
इस महामारी को प्रभाव भी पूरी दुनिया पर उतहा ही खतरनाक था, जितना कि अन्य... इस बात से इसके भयंकर स्वरूप का अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये JUSTINIAN PLAGUE छठी शताब्दी में आया था.


जस्टिनियन प्लेग से दुनिया तकरीबन 4 साल तक प्रभावित रही थी. विशेषज्ञों ने तो ये तक दावा किया कि इस प्लेग से दुनिया के करीब 10 फीसदी से अधिक जनसंख्या खत्म हो गई थी. अनुमान लगाया जाता है कि इससे करीब 3-5 करोड़ लोगों के मारे गए थे. एशिया, नॉर्थ अफ्रीका, अरब और यूरोप में इस संक्रमण ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया था.
आपको बता दें, उस वक्त के बाइजेंटाइन साम्राज्य के शहंशाह जस्टिनियन भी इस भयानक बीमारी से ग्रसित हो गए थे, हालांकि उस वक्त उनकी जान बच गई थी. कहा जाता है कि इसी लिए इस बीमारी का नाम जस्टिनियन प्लेग पड़ गया.

4. HIV/AIDS
HIV (ह्युमन इम्युनडिफिशिएंशी वायरस) जिसे हिन्दी में मानवीय प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाणु कहते हैं. ये एक प्रकार का वायरस यानी विषाणु होता है. जो मनुष्य के शरीर की रोग-प्रतिरक्षा प्रणाली पर प्रहार करता है. इस बीमारी के खिलाफ लड़ने की क्षमता धीरे-धीरे कम होता जाता है. एक स्थिति पर पहुंचकर ये लाइलाज बीमारी एड्स का कारण बन जाता है.


आपको बता दें, मुख्य तौर पर ये यौण संबंध और खूर (रक्त) के माध्यम से फैलने वाला वायरस है, जो शरीर के श्वेत रक्त कणिकाओं को घातक नुकसान पहुंचाता है. ये वायरस इलाज के लिए बहुत बड़ी परेशानी उत्पन्न करता है.

मनुष्यों में होने वाले HIV संक्रमण को WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने महामारी माना है. HIV/AIDS के बारे में पहली बार साल 1981 में पता चला था. जानकारी के अनुसार इसके चपेट में दुनिया के 7.50 करोड़ लोग हैं और अब तक 3.20 करोड़ लोगों की मौत हो चुकी है.

5. COVID-19
वर्तमान में कोरोना वायरस,.. चीन के वुहान से फैले इस वायरस की चपेट में पूरी दुनिया आ चुकी है. इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक दुनियाभर में कोरोना के 16 लाख 3 हज़ार 600 से ज्यादा मामले आ चुके हैं. 3 लाख 56 हजार 440 लोगों ने कोरोना को मात दे दी और 95 हजार 716 लोगों ने जान गंवा दी है.

वो 31 दिसंबर का दिन था, 2019 का आखिरी दिन, दुनिया नए साल के जश्न की तैयारी यही सोच कर रही थी कि आने वाला साल पूरी दुनिया के लिए बीते साल से बेहतर होगा, नए साल ने दस्तक दी तो पूरी दुनिया में जश्न देखने को मिला, लेकिन कौन जानता था कि चीन के वुहान में दबे पांव ऐसा खतरनाक वायरस जन्म ले चुका है जो 2020 में पूरी दुनिया की रफ्तार पर इमरजेंसी ब्रेक लगा देगा.

भला ये कौन जानता था कि पूरी दुनिया के लिए लॉकडाउन शब्द आम हो जाएगा, दुनिया के बड़े-बड़े और चर्चित शहर खाली हो जाएंगे और किसने सोचा था कि इटली, स्पेन, अमेरिका जैसे देशों में अपनों के लिए लोगों को कब्रगाह ढूंढने के लिए हफ्तों की लंबी कतार से गुजरना होगा और फिर भी जमीन ना मिले तो कोसने के लिए कोई नहीं.

नए साल को दस्तक दिए 100 दिन ही तो हुए हैं और चीन की चेतावनी के बाद दुनिया के सामने पहली बार आए कोरोना को जाने हुए भी 100 दिन पूरे हो चुके हैं. जिसमें लगातार WHO से आती एडवाइजरी शामिल हैं. लेकिन बीते 100 दिनों में दुनिया ने जिन बड़े बदलावों को देख लिया है झेल लिया है.

दुनिया ने दो-दो विश्व युद्ध देखे, परमाणु हमला भी देखा, कोविड-19 से पहले भी कई वायरस देखे लेकिन जो हाल कोरोना कर रहा है उससे दुनिया बचे कैसे फिलहाल तो सवाल यही है.

जो डरेगा वही तो बचेगा इसी नीति को अपनाते हुए हर किसी के ज़ेहन में ये बात उतर गई है कि घर पर रहेंगे तभी तो इससे बचे रहेंगे. पूरी दुनिया सबसे बड़ी और कड़ी लड़ाई से दो-दो हाथ कर रही है. अदृश्य दुश्मन को हराने के लिए हर कोई हथियार के निर्माण में जुटा हुआ है. लॉकडाउन की लक्ष्मण रेखा को भी गंभीरता से लेना ही हर किसी के लिए जीवनदान है, कुछ भी लापरवाही, गलती या चूक सबके किए कराए पर पानी फेरा जा सकता है. ऐसे में पूरी दुनिया दहल उठी है. हर कोई ये जानना चाहता है क्या अन्य महामारी की तरह कोरोना भी कई सालों तक रहेगी या फिर कोरोना को हराकर भारत के विश्वगुरू बनने का समय आ चुका है?

#covid19 


WHO से नाराज हुआ ट्रंप प्रशासन..जाने ऐसा क्यू है क्यू इतना नाराज हुए है ट्रंप..


वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने आरोप लगाया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) 'चीन के दुष्प्रचार' का साधन बन गया है और वह कोरोना वायरस (Coronavirus) के मौजूदा संकट में अपनी साख पूरी तरह खो चुका है. ट्रंप ने हाल ही में डब्ल्यूएचओ को दी जाने वाली अमेरिकी धनराशि पर रोक लगाने की घोषणा की थी. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाली इस संस्था पर कोरोना वायरस महामारी के दौरान ‘चीन-केंद्रित’ होने का आरोप लगाया.

डब्ल्यूएचओ में सर्वाधिक योगदान अमेरिका देता है. अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओब्रायन ने मंगलवार को कहा, ‘‘डब्ल्यूएचओ के साथ दिक्कत यह है कि वे इस संकट के दौरान अपनी पूरी साख खो चुके हैं.’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ऐसा नहीं है कि डब्ल्यूएचओ कई साल से बहुत प्रामाणिक संगठन रहा है. अमेरिका डब्ल्यूएचओ पर 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा खर्च करता है. चीन उस पर करीब चार करोड़ डॉलर खर्च करता है जो अमेरिका के योगदान के दसवें हिस्से से भी कम है और उसके बाद भी डब्ल्यूएचओ चीन के दुष्प्रचार का साधन बन गया है.’’

ओब्रायन ने कहा कि 14 जनवरी को डब्ल्यूएचओ ने अमेरिका को भरोसा दिलाया था कि कोविड-19 का मनुष्य से मनुष्य में संक्रमण नहीं हो रहा है जो बाद में पूरी तरह झूठा साबित हुआ. उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ ने फरवरी में चीन और अन्य अति प्रभावित इलाकों से यात्राओं पर अमेरिका और अन्य देशों द्वारा लगाई जा रही पाबंदियों की भी आलोचना की थी. 

ओब्रायन ने कहा, ‘‘उसकी यह बात पूरी तरह अनुचित साबित हुई और सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवरों ने इसे खारिज कर दिया है.’’अमेरिकी एनएसए ने इस तरह से डब्ल्यूएचओ के अनेक दावे गिनाते हुए कहा कि उसके साथ प्रामाणिकता की समस्या है. उन्होंने कहा कि अमेरिका मित्र और सहयोगी देशों के साथ इस बारे में विचार कर रहा है कि क्या इसे सुधारा जा सकता है.

#who #DonaldJTrump 

अर्नब गोस्वामी पर FIR कराएगी कॉन्ग्रेस: साधुओं की मॉब लिंचिंग पर सोनिया गाँधी से पूछे थे तीखे सवाल


कॉन्ग्रेस पार्टी ख़ुद को स्वतंत्र मीडिया और #पत्रकारों की हितैषी बताती है। लेकिन अब उसने ‘#रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक संपादक अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ #एफआईआर दर्ज कराने का फ़ैसला लिया है। पार्टी ने उन पर सोनिया गॉंधी को लेकर गलत टिप्पणी का आरोप लगाया है।

पार्टी का आरोप है कि अर्नब गोस्वामी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। छत्तीसगढ़ के #रायपुर में अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराया गया है। अब पार्टी आधिकारिक रूप से ख़ुद मामला दर्ज करवाएगी। लोग अब कॉन्ग्रेस से #मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर सवाल पूछ रहे हैं।

इससे पहले कॉन्ग्रेस #पार्टी मीडिया पर हमले का मुद्दा उठाती रही है। हाल ही में जब जम्मू-कश्मीर में घृणा फैलाने वाले पत्रकारों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई, तब भी कॉन्ग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए मीडिया की आज़ादी का हवाला दिया था।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी माँग की है कि अर्नब गोस्वामी पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने सांसद राजीव चंद्रशेखर से अर्नब को बर्खास्त करने की माँग की। चंद्रशेखर ने उन्हें करारा जवाब देते हुए कहा कि अर्नब को कोई नहीं निकाल सकता, उन्होंने ये सब अपनी मेहनत से ख़ुद पाया है और ‘रिपब्लिक’ के ओनर वही हैं।

बता दें कि #महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं सहित तीन लोगों की भीड़ ने निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। लेकिन #कॉन्ग्रेस चुप रही। राज्य सरकार में वह शिवसेना के साथ सत्ता में साझीदार है। इस मॉब लिंंचिंग पर चुप्पी को लेकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष #सोनिया गॉंधी को घेरते हुए ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी ने तीखे सवाल पूछे थे।

#अर्नब ने कहा था कि इस मामले में मीडिया का रवैया काफ़ी पक्षतापूर्ण है। #कोरोना #वायरस पर तो सभी #न्यूज़ चैनल कार्यक्रम कर रहे हैं। लेकिन साधुओं की मॉब #लिंचिंग पर सारे के सारे मौन धारण किए हुए हैं। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस #अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर भी निशाना साधा था और उनसे सवाल पूछे।

दही के साथ अजवाइन का करें इस्तेमाल, फिर देखें क्या होता है 'चमत्कार'

दही के साथ अजवाइन का करें इस्तेमाल, फिर देखें क्या होता है 'चमत्कार'         घर की रसोई में रखा अजवाइन (Ajwain) सेहत की कई समस्याओं ...