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Sunday, May 10, 2020

प्राइवेट स्कूल वालों से ना घबराए पैरंट्स उधार लेकर स्कूल फीस जमा करने की नहीं है जरूरत


नांवा शहर, (जयपुर) राजस्थान प्राइवेट स्कूल पैरंट्स फोरम टीम के अध्यक्ष सोनू गुप्ता (मंगल) ने बातचीत करते हुए बताया कि हमने 26/04/2020 को राजस्थान सरकार से अपील की थी जो Covid19 कि विकट स्थिति को देखकर राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी, परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास जी, शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा जी को लेटर दिया था की प्राइवेट स्कूल वाले अपनी मनमानी कर रहे हैं

प्राइवेट स्कूल वाले पेरेंट्स को स्कूल फीस के लिए बार-बार मैसेज और कॉल करके डरा रहे हैं राजस्थान प्राइवेट स्कूल पैरंट्स फोरम टीम का कहना है की अब कोई भी प्राइवेट स्कूल वाला अगर पैरंट्स को बार-बार फीस जमा कराने के लिए परेशान करते हैं तो पैरंट्स उन स्कूल वालों को डायरेक्ट बोल सकते हैं पैरंट्स प्राइवेट स्कूल वालों से घबराए नहीं फीस जमा कराने को व कर्जा लेकर ब्याज पर लेकर या किसी से उधार लेकर स्कूल फीस जमा कराने की कोई जरूरत नहीं है

और ऐसे मैं कई पेरेंट्स हैं जो फीस जमा करने में सक्षम नहीं है मैं उनसे बार-बार हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि प्लीज डरे नहीं आप राजस्थान प्राइवेट स्कूल पेरेंट्स टीम को कॉल करके बता सकते हैं यह है नंबर 9314015257, 7014321434, 8741910777, 7976425372 राजस्थान प्राइवेट स्कूल पैरंट फोरम टीम की मेहनत के अनुसार हम राजस्थान सरकार का बहुत-बहुत धन्यवाद करते है माननीय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी ने कहा है कि अगर कोई भी प्राइवेट स्कूल वाले फीस के लिए दबाव बनाते हैं तो उसकी स्कूल की मान्यता रद्द कर देंगे, अन्यथा राजस्थान प्राइवेट स्कूल पैरेंट्स टीम की मेहनत रंग लाई और मैं आपसे यही विनती है कि आप घबराएं नहीं हम लोगों ने अपील कर रखी है कि तीन महीने की फीस माफ करें, आप थोड़ा सा इंतजार करें हमारी यह अपील भी जरूर रंगत लाएगी |


Friday, May 8, 2020

कैलाश से कम नहीं है औरंगाबाद का शिव धाम, जाने कितना पुराना है ये मंदिर और आज तक पूरी दुनिया इसके कौन से रहस्य को नहीं खोज पायी


#इतिहास_को_जाने...

#कैलाश_मंदिर

इस मंदिर के बारे मे पश्चिम के वैज्ञानिक कहते हैं कि इसे किसी एलियन सभ्यता ने बनाया होगा ,आजका मनुष्य भी ऐसे मंदिर आज भी नहीं बना सकता

सन 1682 में उस मुग़ल शासक ने 1000 मजदूरों को इकट्ठा किया और इस मंदिर को तोड़ने का काम दिया,

मजदूरों ने 1 साल तक इसे तोड़ा,
1 साल लगातार तोड़ने के बाद वो सब इसकी कुछ मूर्तियाँ ही तोड़ सके, हार कर उस मुग़ल शासक ने उन्हें वापस बुला लिया,

वो शासक था औरंगजेब, जिसकी मूर्ख सेना ये समझ बैठी थी कि ये कोई ईंट और मिट्टी से बना साधारण मंदिर है।।

लेकिन उन्हें कहाँ पता था कि ये मंदिर हमारे पूर्वजों ने धरती की सबसे कठोर चट्टान को चीरकर बनाया है।

ये वही पत्थर है जो करोड़ों साल पहले धरती के गर्भ से लावे के रूप में निकला था और बाद में ठंडा होकर जमने से, इसने पत्थर का रूप लिया

कैलास मंदिर को U आकार में उपर से नीचे काटा गया है जिसे पीछे की तरफ से 50 मीटर गहरा खोदा गया है। पर आप सोचिये इतनी कठोर और मजबूत चट्टान को किस चीज़ से काटा गया होगा?।।
हथौड़े और छेनी से??

आपको मंदिर की दीवारों पर छेनी के निशान दिख जायेंगे पर वहाँ के आध्यात्मिक गुरुओं का कहना है कि ये छेनी के निशान बाद के हैं! 

जब पूरा मंदिर बना दिया गया ये बस किनारों को Smooth करने के लिए उपयोग की गयीं थी। इतनी कठोर बेसाल्ट चट्टान को खोद कर उसमे से इस मंदिर को बना देना कहाँ तक संभव है???

कुछ खोजकर्ताओं का कहना है कि इस प्रकार की जटिल संरचना का आधुनिक तकनीक की मदद से निर्माण करना आज भी असंभव है।

क्या वो लोग जिन्होंने इस मंदिर को बनाया आज से भी ज्यादा आधुनिक थे?।।
ये एक जायज सवाल है

यहाँ कुछ वैज्ञानिक आँकड़ों पर बात कर लेते हैं! 

पुरातात्विदों का कहना है कि इस मंदिर को बनाने के लिए 400,000 टन पत्थर को काट कर हटाया गया होगा और ऐसा करने में उन्हें 18 साल का समय लगा होगा ।

तो आइये एक सरल गणित की कैलकुलेशन करते हैं

माना की इस काम को करने के लिए वहाँ काम कर रहे लोग 12 घंटे प्रतिदिन एक मशीन की तरह कार्य कर रहे होंगे जिसमें उन्हें कोई ब्रेक या रेस्ट नहीं मिलता होगा वो पूर्ण रूप से मशीन बन गये होंगे ।

तो अगर 400,000 टन पत्थर को 18 साल में हटाना है तो उन्हें हर साल 22,222 टन पत्थर हटाना होगा , जिसका मतलब हुआ 60 टन हर दिन और 5 टन हर घंटे ।

ये समय तो हुआ मात्र पत्थर को काट कर अलग करने का।

उस समय का क्या जो इस मंदिर की डिजाईन, नक्काशी और इसमें बनाई गयीं सैंकड़ों मूर्तियों में लगा होगा।

एक प्रश्न जो और है वो ये है कि जो पत्थर काट कर बाहर निकाला गया वो कहाँ गया?? उसका इस मंदिर के आसपास कोई ढेर नहीं मिलता।

ना ही उस पत्थर का इस्तेमाल किसी दूसरे मंदिर को बनाने या अन्य किसी संरचना में किया गया!

आखिर वो गया तो गया कहाँ??

क्या आप को अभी भी लगता है कि ये कारनामा आज से हजारों वर्ष पहले मात्र छेनी और हथौड़े की मदद से अंजाम दिया गया होगा।

राष्ट्रकूट राजाओं ने वास्तुकला को चरम पर लाकर रख दिया, जैसा कि बताया जाता है इस मंदिर का निर्माण राष्ट्रकूट वंश के राजा कृष्ण प्रथम(756 - 773) ने करवाया था।

यह मंदिर उस भारतीय वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है जिसका मुकाबला पूरी दुनिया में आज भी कोई नहीं कर सकता।

ये उस मुग़ल शासक की बर्बरता और इस मंदिर के विरले कारीगरों की कुशलता दोनों को साथ में लिए आज भी खड़ा है और हमारे पूर्वजों के कौशल और पुरुषार्थ के सबूत देते हुए आधुनिक मानव को उसकी औकात दिखाते हुए कह रहा है कि दम है तो मुझे फिर से बनाकर दिखाओ।

ये औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में भगवान शिव का मंदिर है।

जो एक पहाड़ को काटकर बनाया गया है और इसको बनाने में 200 साल लगे हैं।

अच्छे से अच्छा धरोहर हमारे देश मे हैं कभी इनपर ध्यान दीजिए।

औरंगाबाद का कैलाश शिव मंदिर:

हम बात कर रहे हैं औरंगाबाद में स्थित भगवान शिव के इस मंदिर की।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भगवान शिव के इस मंदिर के रहस्य के बारें में आज भी मात्र 10 से 15 प्रतिशत हिन्दू ही जानते हैं।

लेकिन औरंगाबाद स्थित कैलाश मंदिर के बारें में बोला जाता है कि इस मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य यही है कि इसमें ईंट और पत्थरों का इस्तेमाल नहीं हुआ है।

एक पहाड़ी को इस तरह से काटा गया है कि आज एक पहाड़ी ही मंदिर है।

इस मंदिर को ऊपर से नीचे बनाया गया है।
जबकि आज इमारत हम नीचे से ऊपर बनाते हैं।

आज तक विज्ञान भी कैलाश मंदिर की इस सच्चाई का पता नहीं लगा पाया है कि किस तरह से और किस तरह की मशीनों से इस शिव मंदिर का निर्माण किया गया होगा।

भारत तो दूर की बात है अमेरिका, रूस के वैज्ञानिक भी ऐसा बोलते हैं कि इस मंदिर को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे मंदिर स्वर्ग से बना-बनाया ही उतारा गया हैं।

वेदों में बौमास्त्र नामक एक अस्त्र लिखा गया गया है जो शायद इस तरह के निर्माण को कर सकता था।

इस मंदिर के निर्माण में 40 हजार टन भारी पत्थर का निर्माण किया गया है तब जाकर 90 फीट ऊँचा मंदिर बना था।
साभार

Tuesday, May 5, 2020

कोरोना के मामले छुपाना ममता बनर्जी को पड़ गया भारी, राज्य में 24 घंटे में 98 मरीजों की मौत


नई दिल्ली: कोरोना (Coronavirus) संक्रमण के मामलों को छुपाना पश्चिम बंगाल (West Bengal) सरकार को अब भारी पड़ रहा है. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि बीते 24 घंटे में देश में कोरोना संक्रमण से हुई 195 मौतों में से रिकॉर्ड 98 डेथ सिर्फ पश्चिम बंगाल में हुई हैं. बता दें कि कुछ दिन पहले ही केंद्र की टीमों को निरीक्षण करने से बंगाल में स्थानीय प्रशासन ने रोक दिया था. 

आंकड़ों के मुताबिक देशभर में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 3900 नए मामले सामने आए हैं. जिनमें से 1567 केवल महाराष्ट्र से हैं. यानी देश के 2 राज्यों ने संक्रमण के लिहाज से देश के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर कर दी. यदि बीते 24 घंटे में देशभर के राज्यों का आकलन करें तो सबसे ज्यादा संक्रमण के मामले 6 राज्यों में सामने आए हैं इनमें महाराष्ट्र सबसे टॉप पर 

पिछले 24 घंटों के आंकड़े
- महाराष्ट्र में 1567 नए मामले 
- तमिलनाडु में 527 नए मामले
- गुजरात में 376 नए मामले
- दिल्ली में 349 नए मामले
- पश्चिम बंगाल में 296 नए मामले
- राजस्थान में 175 नए मामले

यानी बीते 24 घंटे इन 6 राज्यों में कोरोना के 3290 नए मामले सामने आए हैं. इसी के साथ मौतों के आंकड़ों को देखें तो पश्चिम बंगाल इसमें सबसे टॉप पर है. बीते 24 घंटे में कोरोना से देश में 195 लोगों की मौतें हुई हैं इनमें से 98 सिर्फ और सिर्फ बंगाल में ही हुईं.

बंगाल के अलावा जिन दूसरे राज्यों में एक दिन में सबसे ज्यादा कोरोना मरीजों की डेथ हुई है उनमें से महाराष्ट्र में 35, गुजरात में 29, मध्यप्रदेश में 9, उत्तर प्रदेश में 7 और राजस्थान में 6 मौतें हुई हैं. 

बीते 3 दिनों में देश में कोरोना संक्रमण के 10,000 से ज्यादा मामले आ चुके हैं और मौतों का आंकड़ा भी उसी सफ्तार से बढ़ रहा है. अभी तक देश में हालात कंट्रोल में थे लेकिन जिस तरह से स्थितियां तेजी से बदल रही हैं उसको देखकर मुश्किल स्थिति का अंदेशा ज्यादा हो रहा है

इस महीने की शुरुआत में यानी 1 मई को देश में संक्रमण के मामले 35043 ही थे. जबकि मौतों की संख्या 1147 थी. 5 मई को संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 46 हजार को पार कर गया है जबकि 1568 मरीजों की जान जा चुकी


ढंग से राजनीति भी नहीं कर पाती कांग्रेस, मिनटों में उतर गई कलई!


नई दिल्ली: रेल मंत्रालय ने अपने घर से दूर फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की. लेकिन इस पर जमकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया. कांग्रेस और विपक्ष ने इसे सरकार पर निशाने का हथियार बना लिया. लेकिन सच सामने आया तो सब हक्के बक्के रह गए. 

यहां से शुरू हुआ विवाद 
श्रमिक स्पेशल ट्रेनें सामाजिक सरोकार के तहत चलाई गई हैं. रेल मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा कि 'रेलवे ने देश के विभिन्न हिस्सों से अब तक 34 श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाई हैं और संकट के इस समय में विशेष रूप से गरीब से गरीब लोगों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा प्रदान करने की अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को पूरा कर रही है.' रेल मंत्रालय के इस आदेश के बाद ट्रेनों का परिचालन शुरू हो गया. 

लेकिन इस पर विवाद इसलिए शुरू हो गया क्योंकि आरोप लगाया गया कि भूखे प्यासे श्रमिकों को घर पहुंचाने के एवज में उनसे मोटी रकम वसूली जा रही है. विपक्ष ने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि जिन गरीब मजदूरों के पास खाने के लिए पैसे नहीं हैं. वह घर पहुंचने के लिए किराया कहां से देंगे. इसके बाद आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया. 

कांग्रेस ने हमेशा की तरह शुरू कर दी राजनीति
मामला गरीब मजदूरों से जुड़ा था. जो कि एक बड़ा वोटबैंक है. इसलिए कांग्रेस ने तुरंत मुद्दा लपकने की कोशिश की. गांधी खानदान तुरंत सामने आ गया. राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला कि 'रेलवे ऐसे समय में रेल टिकट के लिए प्रवासी मजदूरों से पैसे वसूल रहा है जिस समय वह PM-CARE फंड में पैसे दान कर रहा है'. 

इसके बाद माननीय सोनिया गांधी जी प्रकट हुईं और गरीब मजदूरों के लिए घड़ियाली आंसू बहाते हुए अपने कांग्रेसी दरबारियों को आदेश जारी किया कि गरीब मजदूरों के हिस्से का किराया प्रदेश कांग्रेस कमिटियां वहन करेंगी.  

कांग्रेस का झांसा इतना बड़ा था कि महाबुद्धिमान होने का दावा करने वाले सुब्रमण्यम स्वामी भी इसकी चपेट में आ गए. उन्होंने कहा कि "यह कितना मूर्खतापूर्ण है कि सरकार भूखे मजदूरों से रेलवे का महंगा किराया वसूल रही है और विदेश से लोगों को मुफ्त लेकर आ रही है.  अगर रेलवे ने इसकी जिम्मेदारी लेने से मना किया था तो PM केयर्स से इसका इंतजाम करना चाहिए." हालांकि बाद में रेल मंत्रालय से बात करने के बाद उनका भ्रम दूर हुआ. 

ये है पूरी सच्चाई
बाद में रेल मंत्रालय ने पूरी तरह साफ किया कि गरीब मजदूरों से किसी तरह का किराया नहीं वसूला जा रहा था. बल्कि उन्हें घर पहुंचाने का 85 फीसदी खर्च खुद मंत्रालय अपनी तरफ से प्रदान कर रहा था. जबकि 15 फीसदी हिस्सा उन राज्य सरकारों से वसूला जा रहा था, जिन राज्यों के लिए ट्रेनें रवाना हो रही थीं. 

इसे साफ शब्दों में इस प्रकार समझें. यदि किसी जगह का किराया 1000(एक हजार) रुपए है. तो उसमें से 850 रुपए रेल मंत्रालय दे रहा था. 150 रुपए राज्य सरकारों को देना है. इसमें मजदूरों से एक भी रुपए लेने की बात ही नहीं थी.  लेकिन विपक्ष ने भ्रम फैलाकर इस मुद्दे पर हंगामा खड़ा कर दिया. 

राज्य सरकारों ने भी स्पष्ट किया
प्रवासी मजदूरों में से सबसे ज्यादा संख्या बिहार के लोगों की है. जहां के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सामने आकर स्पष्ट किया कि किसी भी मजदूर को एक रुपए भी देने की जरूरत नहीं है. 

#congress #soniagandhi

Monday, May 4, 2020

LOCKDOWN में अपने घर लौट रहे मजदूरों से रेलवे किराया वसूलने की क्या है हकीकत? यहां जानिए पूरा मामला

केंद्र सरकार ने सिर्फ ट्रेन की व्यवस्था की, जबकि मजदूरों का नाम तय करना, राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है.

नई दिल्ली: कोरोना (Coronavirus) का कहर जारी है. इस बीच लॉकडाउन को 17 मई तक एक बार फिर बढ़ा दिया गया है. पीएम मोदी ने बार-बार आग्रह किया है कि कोरोना की लड़ाई में जो जहां है, वहीं रुक जाए. लेकिन 27 अप्रैल को मुख्यमंत्रियो की बैठक में कई मुख्यमंत्रियो ने प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष ट्रेन चलाने का आग्रह किया. इसके बाद श्रमिक नाम से विशेष ट्रेन चलाई गई. अब इसमें कुछ सवाल सामने आए हैं कि क्या मजदूरों से रेलवे ने किराया वसूला?

केंद्र सरकार ने सिर्फ ट्रेन की व्यवस्था की, जबकि मजदूरों का नाम तय करना, राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है. उसी तरह ट्रेन के अंदर खाने की व्यवस्था, सोशल डिस्टेंसिंग और साफ सफाई इत्यादि की व्यवस्था रेलवे ने की, जबकि मजदूरों को स्टेशन तक लाना और फिर गंतव्य स्थान पर पहुंचने के बाद की व्यवस्था, संबंधित राज्य सरकारों को करनी है.

बता दें कि मजदूरों की सूची राज्य सरकारों को तय करनी है. जहां तक किराए की बात है, भारतीय रेल ने 85 फीसदी किराया वहन किया. जिसमें परिचालन खर्च भी सम्मिलित है. राज्य सरकारों को मात्र 15 फीसदी किराया वहन करना है, और वो भी उनकी जिम्मेदारी तय करने के लिए लिया जा रहा है. जिससे की अवांछित और जरूरत से ज्यादा लोग, रेल में सफर न कर सकें


सरकार के उच्चस्तरीय सूत्रों का कहना है कि अगर ये व्यवस्था न होती, तो लाखों की संख्या में लोग रेल में बैठने की होड़ में लग जाते और ये खतरनाक होता. लोग अपने गांव में पहुंचकर दूसरे के लिए समस्या पैदा कर देते. केंद्र सरकार अपने गांव को इटली नहीं बनाना चाहती. सोनिया गांधी के सियासी पत्र से जमीं पर कुछ नहीं बदलने वाला क्योंकि रेलवे ने अपनी तरफ से अभी तक चली 34 ट्रेनों का 85 फीसदी किराया वहन कर लिया है. ऐसे में सोनिया को अपनी राज्य सरकारों के ऊपर दबाव बनाकर 15 फीसदी किराया दिलवाना चाहिए. यहां पढ़िए कुछ महत्वपूर्ण बातें-

1. किसी भी प्रवासी मजदूर से एक पैसा किराया नहीं लिया गया.

2. सभी को अपने गंतव्य स्थान पहुंचने के लिए रेलवे द्वारा कोई टिकट नहीं दिया गया.

3. हर श्रमिक विशेष ट्रेन का 85 फीसदी किराया, केंद्र या रेलवे वहन कर रहा है. जबकि 15 फीसदी किराया, राज्य सरकारों को देना है.

4. रेलवे ने राज्य सरकारों द्वारा तय किए गए प्रवासी मजदूरों का टिकट, राज्य सरकार को सौंप दिया. संबंधित राज्य सरकारों ने तय किए गए मजदूरों को अपनी तरफ से टिकट सौंप कर, ट्रेन यात्रा करने की इजाजत दी

6. मध्य प्रदेश के शिवराज सिंह चौहान ने 15 फीसदी किराया देने की घोषणा की है.

7. जिन्होंने रेलवे से आग्रह किया है, उन्हीं राज्य सरकारों को 15 फीसदी किराया चुकाना है.

8. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पत्र और राहुल गांधी के ट्वीट से विवाद हुआ. जबकि महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की ही सरकार है. इन राज्यों को भी इस नियम के तहत मजदूरों के लिए 15 फीसदी किराया वहन करना पड़ेगा या वहन करना चाहिए.

9. सरकार का कहना है कि बेहतर होता सोनिया के लिए कि, वे अपनी राज्य सरकारों को हिदायत देतीं, ऐसी विशेष ट्रेन का 15 फीसदी हिस्सा का किराया रेलवे को देतीं.

10.गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन के अनुसार, रेलवे ने किसी भी स्टेशन के लिए कोई टिकट जारी नहीं किया है


#covid19 

भारत से पहली फ्लाइट इस देश के लिए हो रही चालू, बुकिंग भी हो चुकी है शुरू

भारत से पहली फ्लाइट इस देश के लिए हो रही चालू, बुकिंग भी हो चुकी है शुरू
   

18 मई से अंतरराष्ट्रीय फ्लाइटों की बुकिंग शुरू

नई दिल्ली: लंबे लॉकडाउन (Lockdown) के बाद अगर आप घूमने का प्लान बना रहे हैं तो समय आ चुका है फटाफट बुकिंग कराने का. भारत से अंतरराष्ट्रीय फ्लाइटों के लिए भी बुकिंग शुरू हो चुकी है. सबसे अच्छी बात ये है कि कुछ देशों ने अपने सभी अंतरराष्ट्रीय टूरिस्टों के लिए एयरपोर्ट्स खोल दिए हैं.

18 मई से अंतरराष्ट्रीय फ्लाइटों की बुकिंग शुरू
ट्रैवल साइट मेकमाईट्रिप के अनुसार 18 मई से अंतरराष्ट्रीय फ्लाइटों की बुकिंग शुरू हो चुकी है. दिल्ली से पहली फ्लाइट बैंकॉक के लिए शुरू हो रही है. श्रीलंकन एयरलाइंस (Srilankan Airlines) आपको बैंकॉक तक की टिकट उपलब्ध करा रहा है. हालांकि ये फ्लाइट पहले कोलोंबो जाएगी फिर आपको वहां से बैकॉक पहुंचाएगी.

थाईलैंड ने खोल दिए हैं अपने सभी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट
कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण में लॉकडाउन के बीच थाईलैंड ने अंतरराष्ट्रीय टूरिस्टों को देखते हुए अपने सभी एयरपोर्ट्स खोल दिए हैं. कोई भी सैलानी अब थाईलैंड में छुट्टी बिताने जा सकता है. इसी के अलावा खबर है कि इटली भी जल्द अपने अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट खोलने पर विचार कर रही

दिल्ली एयरपोर्ट में सुरक्षा के सभी तैयारियां पूरी
दिल्ली एयरपोर्ट अथॉरिटी लिमिटेड (डायल) के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि एयरपोर्ट पर यात्रियों के लिए सभी तरह के सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं. एयरपोर्ट में प्रवेश से लेकर टिकट काउंटर तक में सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा गया है


Sunday, May 3, 2020

देश में कोरोना ने पकड़ी रफ्तार, बीते 24 घंटे में हर घंटे 3 संक्रमित मरीजों की मौत और जाने कितनी संख्या बढ गयी..

देश में कोरोना ने पकड़ी रफ्तार, बीते 24 घंटे में हर घंटे 3 संक्रमित मरीजों की मौत
   

देश में भले ही #लॉकडाउन को 40 दिन से ज्यादा का वक्त बीत गया हो लेकिन कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही.

नई दिल्ली: देश में भले ही लॉकडाउन को 40 दिन से ज्यादा का वक्त बीत गया हो लेकिन कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही. मई के महीना की शुरुआत होते ही संक्रमण के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होने लगी है. हालत यहां तक पहुंच गई है कि मृत्यु दर बीते दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ गई है. देश में कोरोना संक्रमण से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 1306 हो गया है. 10887 लोग अभी तक ठीक हो चुके हैं. अभी तक देश में 28070 एक्टिव मामले हैं. अब तक कुल 40263 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं. 

आज यानी 3 मई की ही बात करें तो बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के रिकॉर्ड 2487 संक्रमण के मामले सामने आए हैं जबकि सबसे ज्यादा 84 संक्रमित मरीजों की मौत हुई है. यानी 24 घंटे का औसत देखें तो हर घंटे में तीन कोरोना संक्रमण के मरीजों की मौत हो रही है और हर घंटे 110 संक्रमण के मामले सामने आए हैं. 

आपको बता दें यदि 1 सप्ताह पहले की ही बात करें तो बीते महीने 27 अप्रैल कि सुबह 8:00 बजे तक देश में कुल 27892 संक्रमण के मामले थे जबकि 6185 लोगों की मौत हुई. 27 अप्रैल की शाम आते-आते यानी तकरीबन 6:00 बजे तक तक  मरीजों की तादाद 28380 पहुंच गई थी जबकि मौतों की तादाद 6362 हो गई

28 अप्रैल की बात करें तो सुबह 8:00 बजे तक देश में कुल संक्रमण के मामले 29435 थे जबकि मौतों का आंकड़ा 934 था. 28 अप्रैल के बाद से कोरोना संक्रमण के मामलों ने तेजी पकड़ी और ना सिर्फ संक्रमित लोगों की तादाद तेजी से बढ़ती गई बल्कि मौतों का आंकड़ा भी बहुत तेजी से आगे बढ़ा. 

29 अप्रैल को सुबह 8:00 बजे संक्रमण के मामले 31332 हुए जबकि मौतों का आंकड़ा 1000 के पार होकर 1007 हुआ. इस दिन 24 घंटे के भीतर सबसे ज्यादा 71  मौत हुई. 30 अप्रैल को सुबह 8:00 बजे तक कोरोना संक्रमण के मामले बढ़कर 33050 हो गए जबकि मौतों का आंकड़ा 1074 पहुंचा. शाम होते-होते यानी 6:00 बजे तक संक्रमित लोगों की तादाद और बढ़ी और यह संख्या 33610 पर पहुच गई. संक्रमण से मरने वालों की संख्या 1075 हुई. 

1 मई सुबह 8:00 बजे कोरोना संक्रमण के मरीजों की तादाद 35000 को पार करके कुल 35043 हो गई जबकि मौतों का आंकड़ा 1147 पर पहुंच गया. 1 मई को 24 घंटे में 1993 संक्रमण के नए मामले आए जबकि सबसे ज्यादा 73 लोगों की ओर मौत हुई. 1 मई की शाम होते-होते यानी 6:00 बजे तक #कोरोना संक्रमण के मरीजों का आंकड़ा 35365 पहुंच गया जबकि मौतों की तादाद 1152 हो गई. शाम को 24 घंटे में 1752 नए मामले आए जबकि 77 मरीजों की और मौत हुई.


#covid19 #news

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