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Saturday, September 5, 2020

दही के साथ अजवाइन का करें इस्तेमाल, फिर देखें क्या होता है 'चमत्कार'

दही के साथ अजवाइन का करें इस्तेमाल, फिर देखें क्या होता है 'चमत्कार'

दही के साथ अजवाइन का करें इस्तेमाल, फिर देखें क्या होता है 'चमत्कार'
   

घर की रसोई में रखा अजवाइन (Ajwain) सेहत की कई समस्याओं से निजात दिलाने में कारगर हो सकता है. अजवाइन के छोटे-छोटे बीजों में ऐसे गुणकारी तत्‍व मौजूद हैं, जिनसे आप अब तक अंजान हैं. अपच होने पर अकसर गरम पानी और नमक के साथ अजवाइन खाने की हिदायत दी जाती है.

नई दिल्ली: घर की रसोई में रखा अजवाइन (Ajwain) सेहत की कई समस्याओं से निजात दिलाने में कारगर हो सकता है. अजवाइन के छोटे-छोटे बीजों में ऐसे गुणकारी तत्‍व मौजूद हैं, जिनसे आप अब तक अंजान हैं. अपच होने पर अकसर गरम पानी और नमक के साथ अजवाइन खाने की हिदायत दी जाती है. यही नहीं अजवाइन सर्दी-जुकाम, बहती नाक और ठंड से निजात पाने की अचूक दवा है. इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्‍सीडेंट (Antioxidant) और जलनरोधी तत्‍व पाए जाते हैं, जो न सिर्फ छाती में जमे कफ से छुटकारा दिलाते हैं बल्‍कि सर्दी और साइनस में आराम देते हैं. आइये जानते हैं इसके कुछ अचूक फायदे (Benefits of Ajwain).

-सर्दी, गर्मी के प्रभाव के कारण गला बैठ जाता है. इससे निजात पाने के लिए बेर के पत्तों और अजवाइन को पानी में उबालें, फिर उस पानी को छानकर उससे गरारे करें, इससे लाभ होता है.
-आधे सिर में दर्द होने पर एक चम्मच अजवायन आधा लीटर पानी में डालकर उबालें. पानी को छानकर रखें एवं दिन में दो-तीन बार थोड़ा-थोड़ा लेते रहने से काफी लाभ होगा.
-सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छी तरह गरम करें. इससे जोड़ों की मालिश करने पर जोड़ों के दर्द में आराम होता है.
-चोट लगने पर नीले-लाल दाग पड़ने पर अजवायन एवं हल्दी की पुल्टिस चोट पर बांधने पर दर्द व सूजन कम 

-मुख से दुर्गंध आने पर थोड़ी सी अजवायन को पानी में उबालकर रख लें, फिर इस पानी से दिन में दो-तीन बार कुल्ला करने पर दो-तीन दिन में दुर्गंध खत्म हो जाती है.
-अजवाइन से गठिया के रोग में भी आराम मिलता है. अजवाइन के चूरन की पोटली बनाकर घुटनों में सेंकने से फायदा होता है. आधा कप अजवाइन के रस में सौंठ मिलाकर पीने से भी गठिया का रोग ठीक हो जाता है.
-अगर आपके चेहरे पर मुंहासे हैं तो दही के साथ थोड़े से अजवाइन पीसकर इस लेप को चेहरे पर लगाएं. जब लेप सूख जाए तब इसे गर्म पानी से साफ कर लें. कुछ ही दिनों में मुंहासे गायब हो जाएंगे.


-अगर मसूड़ों में सूजन हो तो गुनगुने पानी में अजवाइन के तेल की कुछ बूंदे डालकर कुल्‍ला करने से आराम मिलेगा.  इसके अलावा अजवाइन को भूनकर उसे पीसकर पाउडर बना लें. इससे ब्रश करने से मसूड़ों के दर्द और सूजन में राहत मिलती है


नोट: कोई भी उपाय करने से पहले डॉक्टर्स की सलाह जरूर लें)

#sources #zeenews 


Wednesday, August 26, 2020

Honey Benefits: गरम दूध के साथ शहद देगा ये गजब के फायदे, नहीं जानते होंगे आप


Honey Benefits: गरम दूध के साथ शहद देगा ये गजब के फायदे, नहीं जानते होंगे आप
   

शहद के इन फायदों से अंजान होंगे आप. गर्म दूध के साथ सेवन देगा आपको कई समस्याओं से छुटकारा. 

नई दिल्ली: शहद आप किसी भी रूप में लो, वो आपके शरीर को कई फायदे दैता है. शहद (Honey) में फ्रूट ग्लूकोज, आयरन, कैल्शियम, फॉस्फेट, सोडियम, क्लोरीन, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे गुण होते हैं, जो शरीर को बैक्टीरिया (Bacteria) से बचाने में मदद करते हैं. साथ ही इसमें एंटीसेप्टिक (Antiseptic), एंटीबायोटिक (Antibiotic), विटामिन बी1 (Vitamin-B1) और बी6 (Vitamin-B6) भी भरपूर मात्रा में होते हैं, जोकि सेहत और खूबसूरती दोनों के लिए फायदेमंद है. कई बीमारियों में शहद दवा की तरह भी काम करता है. शहद के सेवन से आंखों की रोशनी बढ़ाई जा सकती है तो वहीं कफ, अस्थमा और हाईब्लडप्रेशर (High blood Pressure) की समस्या से भी छुटकारा पाया जा सकता है. वैसे तो शहद के अनेको फायदे हैं लेकिन क्या आप जानते हैं शहद को गरम दूध क साथ लेने सेहत को कितने लाभ होते हैं. आएये जानते हैं.

1. गर्म दूध में शहद मिलाकर पीने से तनाव दूर होता है. ये तंत्रिका कोशिकाओं और तंत्रिका तंत्र को आराम पहुंचाने का काम करता है.
2. बेहतर नींद पाने के लिए भी गर्म दूध में शहद मिलाकर पीना फायदेमंद होता है. सोने से एक घंटे पहले गर्म दूध में शहद मिलाकर पीना लाभ देता है.
3. पाचन क्रिया को बेहतर बनाए रखने के लिए भी गर्म दूध में शहद का सेवन करना फायदेमंद होता है. इससे कब्ज की समस्या नहीं होने पाती है


#honey #hot milk #health #tips #milk #benifits 

Saturday, July 4, 2020

क्या आप जानते हैं कि संसार का सबसे लम्बा बस रूट "कलकत्ता से लंदन" का था..पढ़े कैसा था ये सफर


क्या आप जानते हैं कि संसार का सबसे लम्बा बस रूट "कलकत्ता से लंदन" का था, इस रुट पर बस 15 अप्रैल 1957 को शुरू हुई थी, यह बस कलकत्ता से चल कर दिल्ली, अमृतसर, वाहगा बार्डर, लाहौर (पाकिस्तान), काबुल, हैरात (अफगानिस्तान), तेहरान (ईरान), इस्तानबुल (तुर्की), जर्मनी, ऑस्ट्रिया, फ्रांस होतेहुए लगभग 7900 किलोमीटर का सफ़र तय करते हुए लंडन पहुंचती थी।

ये बस 1973 तक चलती रही,1957 में इसका किराया 85 पौंड था और 1973 में बस सेवा बंद होने तक बढ़कर 145 पौंड हो गया था।

(अभी आप उसी बस की तस्वीर देख रहे हैं) #अतुल्यभारत

#indiA #LONDON 

Tuesday, June 2, 2020

धरती पर कोरोना वायरस का संकट, अंतरिक्ष से 5.2KM/सेकेंड से आ रही ये नई आफत...


वॉशिंगटन. कोरोना वायरस (coronavirus) के संकट से पूरी दुनिया परेशान है. ऐसे में आसमान से एक बार आफत आने वाली है. अंतिरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने एक ऐसे उल्का पिंड (Asteroid) की पहचान की है जो धरती की ओर तेजी से बढ़ रहा है. एजेंसी ने अपने अलर्ट में कहा कि एक करीब आधा किलोमीटर बड़ा एक धरती (Earth) की तरफ तेजी से आ रहा है. इसकी रफ्तार करीब 5.2 किलोमीटर प्रति सेकेंड है. 

डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, ये उल्का पिंड 6 जून को धरती की कक्षा में दाखिल होगा. यह उल्का पिंड अमेरिका की एम्पायर स्टेट बिल्डिंग से भी बड़ा है. नासा ने इस उल्का पिंड का नाम रॉक-163348 (2002 NN4) रखा है और ऐसी संभावना जताई जा रही है कि कि ये 6 जून को पृथ्वी की सतह के बहुत करीब से गुजरेगा. इसकी संभावित लंबाई 250-570 मीटर है और चौड़ाई 135 मीटर है. ये उल्का पिंड सूर्य के करीब से गुजरता हुआ धरती की कक्षा में दाखिल हो रहा है. 

बीती 21 मई को भी 1.5 किलोमीटर बड़ा उल्का पिंड धरती के काफी करीब से होकर गुजरा था. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस उल्कापिंड की धरती से टक्कर होने की संभावना नहीं है लेकिन इस पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि कभी-कभी गुरुत्वाकर्षण के चलते इस तरह के उल्का पिंड पृथ्वी के परिवेश में आखिरी समय पर भी प्रवेश कर जाते हैं

नासा के मुताबिक, रॉक-163348 (2002 NN4) उल्का पिंड धरती के पास से रविवार को सुबह 8:20 पर गुजरेगा. धरती के इतने पास से इतना बड़ा कोई उल्का पिंड इसके बाद साल 2024 में ही गुजरेगा. इसकी गति 5.2 किमी प्रति सेकेंड है यानी यह उल्कापिंड 11,200 मील प्रति घंटा की रफ्तार से आ रहा है


Sunday, May 10, 2020

प्राइवेट स्कूल वालों से ना घबराए पैरंट्स उधार लेकर स्कूल फीस जमा करने की नहीं है जरूरत


नांवा शहर, (जयपुर) राजस्थान प्राइवेट स्कूल पैरंट्स फोरम टीम के अध्यक्ष सोनू गुप्ता (मंगल) ने बातचीत करते हुए बताया कि हमने 26/04/2020 को राजस्थान सरकार से अपील की थी जो Covid19 कि विकट स्थिति को देखकर राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी, परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास जी, शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा जी को लेटर दिया था की प्राइवेट स्कूल वाले अपनी मनमानी कर रहे हैं

प्राइवेट स्कूल वाले पेरेंट्स को स्कूल फीस के लिए बार-बार मैसेज और कॉल करके डरा रहे हैं राजस्थान प्राइवेट स्कूल पैरंट्स फोरम टीम का कहना है की अब कोई भी प्राइवेट स्कूल वाला अगर पैरंट्स को बार-बार फीस जमा कराने के लिए परेशान करते हैं तो पैरंट्स उन स्कूल वालों को डायरेक्ट बोल सकते हैं पैरंट्स प्राइवेट स्कूल वालों से घबराए नहीं फीस जमा कराने को व कर्जा लेकर ब्याज पर लेकर या किसी से उधार लेकर स्कूल फीस जमा कराने की कोई जरूरत नहीं है

और ऐसे मैं कई पेरेंट्स हैं जो फीस जमा करने में सक्षम नहीं है मैं उनसे बार-बार हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि प्लीज डरे नहीं आप राजस्थान प्राइवेट स्कूल पेरेंट्स टीम को कॉल करके बता सकते हैं यह है नंबर 9314015257, 7014321434, 8741910777, 7976425372 राजस्थान प्राइवेट स्कूल पैरंट फोरम टीम की मेहनत के अनुसार हम राजस्थान सरकार का बहुत-बहुत धन्यवाद करते है माननीय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी ने कहा है कि अगर कोई भी प्राइवेट स्कूल वाले फीस के लिए दबाव बनाते हैं तो उसकी स्कूल की मान्यता रद्द कर देंगे, अन्यथा राजस्थान प्राइवेट स्कूल पैरेंट्स टीम की मेहनत रंग लाई और मैं आपसे यही विनती है कि आप घबराएं नहीं हम लोगों ने अपील कर रखी है कि तीन महीने की फीस माफ करें, आप थोड़ा सा इंतजार करें हमारी यह अपील भी जरूर रंगत लाएगी |


Friday, May 8, 2020

कैलाश से कम नहीं है औरंगाबाद का शिव धाम, जाने कितना पुराना है ये मंदिर और आज तक पूरी दुनिया इसके कौन से रहस्य को नहीं खोज पायी


#इतिहास_को_जाने...

#कैलाश_मंदिर

इस मंदिर के बारे मे पश्चिम के वैज्ञानिक कहते हैं कि इसे किसी एलियन सभ्यता ने बनाया होगा ,आजका मनुष्य भी ऐसे मंदिर आज भी नहीं बना सकता

सन 1682 में उस मुग़ल शासक ने 1000 मजदूरों को इकट्ठा किया और इस मंदिर को तोड़ने का काम दिया,

मजदूरों ने 1 साल तक इसे तोड़ा,
1 साल लगातार तोड़ने के बाद वो सब इसकी कुछ मूर्तियाँ ही तोड़ सके, हार कर उस मुग़ल शासक ने उन्हें वापस बुला लिया,

वो शासक था औरंगजेब, जिसकी मूर्ख सेना ये समझ बैठी थी कि ये कोई ईंट और मिट्टी से बना साधारण मंदिर है।।

लेकिन उन्हें कहाँ पता था कि ये मंदिर हमारे पूर्वजों ने धरती की सबसे कठोर चट्टान को चीरकर बनाया है।

ये वही पत्थर है जो करोड़ों साल पहले धरती के गर्भ से लावे के रूप में निकला था और बाद में ठंडा होकर जमने से, इसने पत्थर का रूप लिया

कैलास मंदिर को U आकार में उपर से नीचे काटा गया है जिसे पीछे की तरफ से 50 मीटर गहरा खोदा गया है। पर आप सोचिये इतनी कठोर और मजबूत चट्टान को किस चीज़ से काटा गया होगा?।।
हथौड़े और छेनी से??

आपको मंदिर की दीवारों पर छेनी के निशान दिख जायेंगे पर वहाँ के आध्यात्मिक गुरुओं का कहना है कि ये छेनी के निशान बाद के हैं! 

जब पूरा मंदिर बना दिया गया ये बस किनारों को Smooth करने के लिए उपयोग की गयीं थी। इतनी कठोर बेसाल्ट चट्टान को खोद कर उसमे से इस मंदिर को बना देना कहाँ तक संभव है???

कुछ खोजकर्ताओं का कहना है कि इस प्रकार की जटिल संरचना का आधुनिक तकनीक की मदद से निर्माण करना आज भी असंभव है।

क्या वो लोग जिन्होंने इस मंदिर को बनाया आज से भी ज्यादा आधुनिक थे?।।
ये एक जायज सवाल है

यहाँ कुछ वैज्ञानिक आँकड़ों पर बात कर लेते हैं! 

पुरातात्विदों का कहना है कि इस मंदिर को बनाने के लिए 400,000 टन पत्थर को काट कर हटाया गया होगा और ऐसा करने में उन्हें 18 साल का समय लगा होगा ।

तो आइये एक सरल गणित की कैलकुलेशन करते हैं

माना की इस काम को करने के लिए वहाँ काम कर रहे लोग 12 घंटे प्रतिदिन एक मशीन की तरह कार्य कर रहे होंगे जिसमें उन्हें कोई ब्रेक या रेस्ट नहीं मिलता होगा वो पूर्ण रूप से मशीन बन गये होंगे ।

तो अगर 400,000 टन पत्थर को 18 साल में हटाना है तो उन्हें हर साल 22,222 टन पत्थर हटाना होगा , जिसका मतलब हुआ 60 टन हर दिन और 5 टन हर घंटे ।

ये समय तो हुआ मात्र पत्थर को काट कर अलग करने का।

उस समय का क्या जो इस मंदिर की डिजाईन, नक्काशी और इसमें बनाई गयीं सैंकड़ों मूर्तियों में लगा होगा।

एक प्रश्न जो और है वो ये है कि जो पत्थर काट कर बाहर निकाला गया वो कहाँ गया?? उसका इस मंदिर के आसपास कोई ढेर नहीं मिलता।

ना ही उस पत्थर का इस्तेमाल किसी दूसरे मंदिर को बनाने या अन्य किसी संरचना में किया गया!

आखिर वो गया तो गया कहाँ??

क्या आप को अभी भी लगता है कि ये कारनामा आज से हजारों वर्ष पहले मात्र छेनी और हथौड़े की मदद से अंजाम दिया गया होगा।

राष्ट्रकूट राजाओं ने वास्तुकला को चरम पर लाकर रख दिया, जैसा कि बताया जाता है इस मंदिर का निर्माण राष्ट्रकूट वंश के राजा कृष्ण प्रथम(756 - 773) ने करवाया था।

यह मंदिर उस भारतीय वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है जिसका मुकाबला पूरी दुनिया में आज भी कोई नहीं कर सकता।

ये उस मुग़ल शासक की बर्बरता और इस मंदिर के विरले कारीगरों की कुशलता दोनों को साथ में लिए आज भी खड़ा है और हमारे पूर्वजों के कौशल और पुरुषार्थ के सबूत देते हुए आधुनिक मानव को उसकी औकात दिखाते हुए कह रहा है कि दम है तो मुझे फिर से बनाकर दिखाओ।

ये औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में भगवान शिव का मंदिर है।

जो एक पहाड़ को काटकर बनाया गया है और इसको बनाने में 200 साल लगे हैं।

अच्छे से अच्छा धरोहर हमारे देश मे हैं कभी इनपर ध्यान दीजिए।

औरंगाबाद का कैलाश शिव मंदिर:

हम बात कर रहे हैं औरंगाबाद में स्थित भगवान शिव के इस मंदिर की।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भगवान शिव के इस मंदिर के रहस्य के बारें में आज भी मात्र 10 से 15 प्रतिशत हिन्दू ही जानते हैं।

लेकिन औरंगाबाद स्थित कैलाश मंदिर के बारें में बोला जाता है कि इस मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य यही है कि इसमें ईंट और पत्थरों का इस्तेमाल नहीं हुआ है।

एक पहाड़ी को इस तरह से काटा गया है कि आज एक पहाड़ी ही मंदिर है।

इस मंदिर को ऊपर से नीचे बनाया गया है।
जबकि आज इमारत हम नीचे से ऊपर बनाते हैं।

आज तक विज्ञान भी कैलाश मंदिर की इस सच्चाई का पता नहीं लगा पाया है कि किस तरह से और किस तरह की मशीनों से इस शिव मंदिर का निर्माण किया गया होगा।

भारत तो दूर की बात है अमेरिका, रूस के वैज्ञानिक भी ऐसा बोलते हैं कि इस मंदिर को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे मंदिर स्वर्ग से बना-बनाया ही उतारा गया हैं।

वेदों में बौमास्त्र नामक एक अस्त्र लिखा गया गया है जो शायद इस तरह के निर्माण को कर सकता था।

इस मंदिर के निर्माण में 40 हजार टन भारी पत्थर का निर्माण किया गया है तब जाकर 90 फीट ऊँचा मंदिर बना था।
साभार

Tuesday, May 5, 2020

कोरोना के मामले छुपाना ममता बनर्जी को पड़ गया भारी, राज्य में 24 घंटे में 98 मरीजों की मौत


नई दिल्ली: कोरोना (Coronavirus) संक्रमण के मामलों को छुपाना पश्चिम बंगाल (West Bengal) सरकार को अब भारी पड़ रहा है. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि बीते 24 घंटे में देश में कोरोना संक्रमण से हुई 195 मौतों में से रिकॉर्ड 98 डेथ सिर्फ पश्चिम बंगाल में हुई हैं. बता दें कि कुछ दिन पहले ही केंद्र की टीमों को निरीक्षण करने से बंगाल में स्थानीय प्रशासन ने रोक दिया था. 

आंकड़ों के मुताबिक देशभर में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 3900 नए मामले सामने आए हैं. जिनमें से 1567 केवल महाराष्ट्र से हैं. यानी देश के 2 राज्यों ने संक्रमण के लिहाज से देश के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर कर दी. यदि बीते 24 घंटे में देशभर के राज्यों का आकलन करें तो सबसे ज्यादा संक्रमण के मामले 6 राज्यों में सामने आए हैं इनमें महाराष्ट्र सबसे टॉप पर 

पिछले 24 घंटों के आंकड़े
- महाराष्ट्र में 1567 नए मामले 
- तमिलनाडु में 527 नए मामले
- गुजरात में 376 नए मामले
- दिल्ली में 349 नए मामले
- पश्चिम बंगाल में 296 नए मामले
- राजस्थान में 175 नए मामले

यानी बीते 24 घंटे इन 6 राज्यों में कोरोना के 3290 नए मामले सामने आए हैं. इसी के साथ मौतों के आंकड़ों को देखें तो पश्चिम बंगाल इसमें सबसे टॉप पर है. बीते 24 घंटे में कोरोना से देश में 195 लोगों की मौतें हुई हैं इनमें से 98 सिर्फ और सिर्फ बंगाल में ही हुईं.

बंगाल के अलावा जिन दूसरे राज्यों में एक दिन में सबसे ज्यादा कोरोना मरीजों की डेथ हुई है उनमें से महाराष्ट्र में 35, गुजरात में 29, मध्यप्रदेश में 9, उत्तर प्रदेश में 7 और राजस्थान में 6 मौतें हुई हैं. 

बीते 3 दिनों में देश में कोरोना संक्रमण के 10,000 से ज्यादा मामले आ चुके हैं और मौतों का आंकड़ा भी उसी सफ्तार से बढ़ रहा है. अभी तक देश में हालात कंट्रोल में थे लेकिन जिस तरह से स्थितियां तेजी से बदल रही हैं उसको देखकर मुश्किल स्थिति का अंदेशा ज्यादा हो रहा है

इस महीने की शुरुआत में यानी 1 मई को देश में संक्रमण के मामले 35043 ही थे. जबकि मौतों की संख्या 1147 थी. 5 मई को संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 46 हजार को पार कर गया है जबकि 1568 मरीजों की जान जा चुकी


दही के साथ अजवाइन का करें इस्तेमाल, फिर देखें क्या होता है 'चमत्कार'

दही के साथ अजवाइन का करें इस्तेमाल, फिर देखें क्या होता है 'चमत्कार'         घर की रसोई में रखा अजवाइन (Ajwain) सेहत की कई समस्याओं ...